इज़राइल-ईरान संघर्ष में लगातार बढ़ रही है मृतकों की संख्या
इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अब तक मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में अब तक 220 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग घायल हुए हैं।
इसका जवाब देते हुए ईरान ने इज़राइल की सीमा में सैकड़ों मिसाइलें दागीं, जिससे 20 से अधिक लोगों की जान गई और भारी मात्रा में संपत्ति का नुकसान हुआ है।
पाकिस्तान, जो अपने दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत से होकर ईरान के साथ लगभग 905 किलोमीटर (562 मील) लंबी सीमा साझा करता है, उसने ईरान के लिए मजबूत समर्थन जताया है। हालांकि, 15 जून से पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में पाँच सीमा चौकियाँ बंद कर दी हैं।
हाल के दिनों में 500 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक, जिनमें ज़्यादातर तीर्थयात्री और छात्र शामिल हैं, ईरान से लौटे हैं। ताफ्तान के सहायक आयुक्त नईम अहमद ने अल जज़ीरा को बताया, “सोमवार को हमारे 45 छात्र पाकिस्तान लौटे, जो ईरान के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे थे। इसके अलावा लगभग 500 तीर्थयात्री भी ताफ्तान बॉर्डर से वापस आए।”
ताफ्तान, ईरान की सीमा से सटा पाकिस्तान का एक अहम शहर है, जो बलूचिस्तान के चाघी जिले में स्थित है। यह इलाका अपनी पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ 1998 में पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए थे। इसके अलावा यहां की रेक़ो डिक और सैंदक खदानें भी मशहूर हैं, जो सोने और तांबे के भंडार के लिए जानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा बंद करने का प्रमुख कारण बलूचिस्तान में बढ़ती असुरक्षा की स्थिति है, जो ईरान के साथ उसके संबंधों पर भी असर डाल रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि वे सीमा पार हमलों को अंजाम देने वाले सशस्त्र समूहों को शरण दे रहे हैं।
इस संघर्ष की सबसे हालिया घटना जनवरी 2024 में हुई, जब ईरान ने जैश अल-अदल नामक अलगाववादी गुट को निशाना बनाते हुए पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मिसाइल हमले किए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की और ईरानी सीमा के अंदर बलूच अलगाववादियों के ठिकानों पर हमला किया।
सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संसद में कहा कि पाकिस्तान ईरान के साथ शांतिपूर्ण संवाद के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस्लामाबाद, इज़राइल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव को खत्म करने के लिए एक कूटनीतिक भूमिका निभाने को तैयार है।
टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में विजिटिंग रिसर्च स्कॉलर फहद हुमायूं का मानना है कि पाकिस्तान के शांति के प्रयासों को अमेरिका से समर्थन मिल सकता है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भी आधिकारिक रूप से बातचीत को युद्ध से बेहतर मानता है।

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